Friday, November 7, 2025

 मैं चला जाऊँगा, पर यादों की गलियों में बस जाऊँगा,  

पुरानी सर्दियों की ठंडी हवा बनकर तेरे आस-पास मुस्कुराऊँगा, 

लफ़्ज़ों की ख़ामोशी में वो अनकही बात छोड़ जाऊँगा,  

जो न सुनी किसी ने, वो दास्तान बन कर गुनगुनाऊँगा,  

मैं चला जाऊँगा, पर तेरी यादों में हमेशा लौट आऊँगा...