मैं चला जाऊँगा, पर यादों की गलियों में बस जाऊँगा,
पुरानी सर्दियों की ठंडी हवा बनकर तेरे आस-पास मुस्कुराऊँगा,
लफ़्ज़ों की ख़ामोशी में वो अनकही बात छोड़ जाऊँगा,
जो न सुनी किसी ने, वो दास्तान बन कर गुनगुनाऊँगा,
मैं चला जाऊँगा, पर तेरी यादों में हमेशा लौट आऊँगा...